New rules of SEBI in Hindi : म्युचुअल फंड में निवेश हुआ Safe, जानें कैसे?

New rules of SEBI in Hindi : Security Exchange Board of India (SEBI) ने म्‍युचुअल फंड के निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए कई अहम फैसले लिये हैं। सेबी ने म्‍युचुअल फंड उत्‍पादों में जोखिम के स्‍वरूप को अधिक स्‍पष्‍ट करने और इनकी पहचान बताने के लिए 3 अहम बदलाव किए हैं।

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इसके लिए लेबलिंग के तरीके में बदलाव कराया गया है। ये रहें वे 3 बदलाव-

1-VERY HIGH RISK होगी नई कैटेगरी

New rules of SEBI in Hindi : अब म्यूचुअल फंड में जोखिम का स्‍तर बताने के लिए RISK-O-METER  (रिस्क-ओ-मीटर) में नई श्रेणी जोड़ी गई है। इस नई कैटेगरी को ‘VERY HIGH RISK’  के नाम से जाना जाएगा।

इक्विटी आधारित म्‍युचुअल फंड्स में जोखिम के स्‍तर को पता करने के लिए RISK-O-METER  होता है। अब तक RISK-O-METER  में 5 कैटेगरीज- Low, Low to moderate, moderate, Moderatly High और High हुआ करती थी। लेकिन नए बदलाव के तहत म्‍युचुअल फंड की जिन स्‍कीम्‍स में बहुत ज्‍यादा जोखिम होगा, यानी उसे VERY HIGH RISK कहा जाएगा।

सेबी की ओर से जारी सर्कुलर में नई और पुरानी सभी तरह की स्कीमों में ये बदलाव करने जरूरी होंगे। सर्कुलर में कहा गया है कि सभी म्यूचुअल फंड्स को हर माह इस RISK-O-METER  की समीक्षा करनी होगी। अगर यहां कोई बदलाव होता है तो इसकी जानकारी निवेशकों ई-मेल या एसएमएस के ज़रिए देनी होगी।

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यही नहीं, फंड के पोर्टफोलियो का ब्योरा भी महीना पूरा होने के 10 दिन के भीतर अपनी और एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड ऑफ इंडिया (AMFII) की वेबसाइट पर बताना होगा।

इसके अलावा निवेशकों को हर फाइनेंशियल इयर की समाप्ति के अंत में रिस्क-ओ-मीटर में होने वाले बदलावों और इनकी बदलावों की संख्‍या की जानकारी भी देनी होगी।

क्‍या होगा लाभ

सेबी के इस नियम से निवेशकों को म्‍युचुअल फंड में जोखिम के स्‍तर का सही पता चल सकेगा। नतीजतन वे उत्‍पादों में निवेश से पहले सही निर्णय ले सकेंगे। साथ ही म्‍युचुअल फंड स्‍कीम्‍स के प्रति निवेशकों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

2- डिविडेंड को एफडी बताकर नहीं बेच सकेंगे

New rules of SEBI in Hindi : डिविडेंड के मामले में म्‍युचुअल फंड रेग्‍युलेटर सेबी बाजार ने संशोधन किया है। अब म्यूचुअल फंड कंपनियां अपनी मर्जी से फंड की राशि किसी स्कीम में ट्रांसफर नहीं कर सकेंगी।

डिविडेंड आधारित म्यूचुअल फंड की स्‍कीम्‍स में निवेश करने पर डिविडेंड भी मिलता है। म्‍युचअल फंड की तीन कैटेगरीज हैं।

इनमें ग्रोथ, डिविडेंड और डिविडेंड रीइन्वेस्टमेंट के ऑप्शन शामिल होते हैं। सेबी की जानकारी में आया है कि छोटे शहरों में एजेंट डिविडेंड ऑप्शन को एफडी बताकर बेचते हैं। जो मिससेलिंग के दायरे में आता है। वे निवेशकों को हर माह कमाई दिलाने का वादा करते हैं।

सेबी ने अब डिविडेंड ऑप्शन का नाम बदलकर Income distribution cum withdrawl Plan (इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम विड्रॉल प्लान) कर दिया है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डिविडेंड कब मिलेगा इसकी कोई समय सीमा या धनराशि तय नहीं की जा सकती। यह तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर भी मिल सकता है।

कंपनी चाहे तो डिविडेंड न देने का भी फैसला कर सकती है। लेकिन कुछ एजेंट आम लोगों को इसे हर माह इंटरेस्‍ट का जरिया बताकर बेच रहे थे। उनका कहना है कि सेबी की सख्ती के बाद आम लोगों को फायदा होगा और मिस सेलिंग पर लगाम लगेगी।

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3- बिना अनुमति के फंड ट्रांसफर नहीं करेंगी एएमसी

New rules of SEBI in Hindi : म्युचुअल फंड के निवेशक शुरुआत में रेटिंग और पड़ताल के बाद स्कीम का चयन करते हैं। लेकिन कभी कभी फंड मैनेजर ज्यादा जोखिम वाली स्कीम में फंड ट्रांसफर कर देते हैं। इससे फंड के डूब सकता है। फंड मैनेजरर्स की इन करतूत पर सेबी ने सख्ती लगा दी है।

अब यदि एक स्कीम का पैसा दूसरे में ट्रांसफर किया जाता है। नतीजतन अगर उस स्कीम की रेटिंग 4 महीने के भीतर घट जाती है तो फंड मैनेजर सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।

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बता दें कि अगर आप अगर म्‍युचुअल फंड में नि‍वेश के इच्‍छुक हैं तो ऑनलाइन निवेश के लिए आपको डीमैट अकाउंट खोलना होगा। इसके लिए NJ India Invest Ltd में E Wealth Account  पर जाकर रजिस्‍ट्रेशन करें। यहां पैन कार्ड, आधार अपलोड कर अपना केवाईसी प्रोसेस पूरा करें।

आपके ईमेल पर अकाउंट का कन्‍फर्मेशन आते ही आप निवेश के लिए तैयार हो जाएंगे। किसी तरह की असुविधा होने पर आप 7860678995 पर WHATSAPP संपर्क कर सकते हैं। इस पर आपको आजीवन फ्री सलाह दी जाएगी।

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