Retirement Planning kaise kare : नौकरी ज्‍वाइन करते ही करें रिटायरमेंट प्लानिंग

Retirement Planning kaise kare : युवाओं में रिटायरमेंट को लेकर सोच बदलने लगी हैं। नाना-दादा के जमाने में 60 से 62 साल तक की उम्र को रिटायरमेंट के लायक माना जाता था। आज का नौकरीपेशा युवा 50 से 55 साल की उम्र में ही रिटायरमेंट लेना चाहता है।

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अब वो रोज-रोज 10 से 6 बजे की जॉब में ज्‍यादा सालों तक काम करने का इच्‍छुक नहीं है। आज के युवा कम उम्र में फाइनेंशियल फ्रीडम पा लेना चाहते हैं ताकि वे मिडिल एज में कमाए गए पैसों का भरपूर आनंद ले सकें। साथ ही बुढ़ापे में पैसों की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर सकें।

रिटायरमेंट बाद की लाइफ आसान और सुकूनभरी बनाने के लिए पहले से ही योजनाएं बनाने की जरूरत है। ताकि रिटायरमेंट तक पैसों का बड़ा अंबार खड़ा किया जा सके। इसलिए अगर आप नौकरीपेशा है या बिजनेसमैन। तो जल्द ही रिटायरमेंट प्‍लानिंग की शुरुआत कर लें।

अगर आपने सुनियोजित तरीके से निेवश किया तो ये तय है कि आप 55 से 60 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए अच्छी धनराशि जुटा लेंगे।

क्‍यों जरूरी है रिटायरमेंट प्‍लानिंग

1-कोई प्राइवेट एंप्लॉयर पेंशन प्लान नहीं देती

Retirement Planning kaise kare : आज शायद ही कोई प्राइवेट या कार्पोरेट कंपनी है जो अपने कर्मचारियों को पेंशन प्लान देती हों। अगर कोई कंपनी पेंशन देने का प्रावधान हो भी तो कर्मचारी कितने सालों तक एक ही एम्‍पलायर के यहां काम करेंगे।

ज्‍यादातर युवा अच्‍छी सैलरी हाइक और प्रमोशन पाने के लिए नियोक्‍ता कंपनी में बदलाव करते हैं। जल्‍दी नौकरी बदलने की सूरत में वे पेंशन तो दूर ग्रेच्‍युटी पाने के भी हकदार नहीं बन पाते। क्‍योंकि सुपर एनुअटी और ग्रेच्‍युटी दोनों के लिए किसी एक कंपनी में कुछ तय समयावधि तक काम करना जरूरी होता है।

इसके अलावा आर्थिक मंदी और छंटनी के दौर में प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नौकरी बचाए रखना भी आसान नहीं रह गया है। कोरोना काल में सबने इसकी बानगी देखी ही है। एक आंकड़ें के मुताबिक ही सितंबर 2020 तक लगभग 77 लाख लोगों ने नौकरियां गवाईं हैं। अब ऐसे में प्राइवेट कंपनियों के पेंशन देने की बात भी बेमानी ही है।

2-औसत आयु बढ़ने से बढ़ा रिटायरमेंट कॉर्पस

विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि  साल  2010 में जीवन प्रत्याशा 65.13 प्रतिशत थी। इससे पहले साल 2000 में 61.61 प्रतिशत और 1990 में 58.35 प्रतिशत थी। स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में सुधार और मेडिकल साइंस की तरक्‍की के चलते मनुष्‍यों की औसत आयु में इजाफा हो रहा है। लंबी आयु का मतलब है कि आपको गुजर बसर के लिए ज्‍यादा पैसों की जरूरत पड़ने वाली है। इसलिए खर्चों और लाइफस्टाइल को मेनटेन रखने के लिए रिटायरमेंट की बचत में बड़ा कॉर्पस होना जरूरी है।

3- रिटर्न को महंगाई डायन से भी बचाना है

Retirement Planning kaise kare : महंगाई अपनी रफ्तार से बढ़ती है। और लगातार बढ़ती जा रही है। आज के दौर में आटा के साथ डाटा भी जरूरी हो गया है।

लग्जरी समझी जाने वाली चीजें जैसे मोबाइल फोन, कम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप आदि अब जरूरत बन चुके हैं। इसलिए रिटायरमेंट कॉर्पस और रिटर्न का गणित लगाते वक्‍त सेविंग को महंगाई डायन से बचाना भी जरूरी है।

मोटे अनुमान के मुताबिक भारत में औसत महंगाई दर 5 से 6 प्रतिशत सालाना के बीच बनी रहती है। इसका सीधा मतलब ये है कि अगर आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न यदि 6 प्रतिशत सालाना से अधिक है तभी इसे शुद्घ रिटर्न कहा जाएगा।

उदाहरण- अगर आपको एक वित्‍तीय वर्ष में अपने निवेश पर 9 प्रतिशत रिटर्न मिलता है। तब उसमें से महंगाई दर घटा देने से 3 प्रतिशत का शुद्ध रिटर्न मिलेगा।

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रिटायरमेंट प्लानिंग के क्‍या हैं फायदे

Retirement Planning benefits : रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना अच्‍छा है। निवेश का कोई भी साधन जितनी जल्‍दी अपनाएंगे, उतना ही कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।

कई गुना रिटर्न पाने के लिए निवेशित रकम को ज्‍यादा समय देना भी जरूरी होता है। आपका रिटायरमेंट कॉर्पस किस तरह से बढ़ेगा, आइए इसे बेहद आसान से उदाहरण से समझते हैं।

ऐसे मिलेगा कंपाउंडिग का फायदा

दिव्‍या ने 25 साल की उम्र में 50 हजार रुपये का एकमुश्‍त निवेश किया। उसने 25 साल तक इस रकम को महज 8 प्रतिशत के इंटरेस्‍ट रेट पर निवेशित रखा। 50 साल की उम्र होने पर दिव्‍या का कॉर्पस 3 लाख 67 हजार हो गया है। उसने 50 हजार की रकम पर 3 लाख 17 हजार का रिटर्न कमाया।

वहीं, रमेश ने 35 साल की उम्र में 1 लाख रुपये 8 प्रतिशत सालाना ब्‍याज दर पर लगाए। 15 साल बाद 50 की उम्र में रमेश ने पाया कि उनकी निवेशित रकम लगभग 3 लाख 30 हजार रुपये हो गई है। उन्‍होंने 2 लाख 30 हजार का रिटर्न कमाया।

उदाहरण से साफ है कि दिव्‍या ने कम रकम को ज्‍यादा समय देकर रमेश की तुलना में बड़ा रिटायमेंट कार्पस बनाया है। यही कंपाउंडिंग का जादू है। इसलिए अगर आप ज्‍यादा देर में रिटायरमेंट प्‍लानिंग करते हैं तो रिटायरमेंट बाद आपका कॉर्पस छोटा बनेगा।

कितना हो रिटायरमेंट कॉर्पस

Retirement Planning kaise kare :अगर आपने रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने का फैसला कर लिया है तो आप पूछेंगे कि मुझे कितना बड़ा रिटायमेंट कॉर्पस बनाना चाहिए। रिटायमेंट कॉर्पस मौजूदा मासिक खर्च के आधार पर बनाया जाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर अगर 35 साल की उम्र में आपका मासिक खर्च 40 हजार रुपये है। 25 साल बाद आप 60 के होते ही रिटायर होने वाले हैं। अगर रिटायरमेंट से पहले और बाद की महंगाई को 5 प्रतिशत माना जाए।

तो रिटायमेंट बाद आपका मासिक खर्च लगभग 1 लाख 35 हजार रुपये होगा। अगर यहां जीवन प्रत्‍याशा 80 साल ही रखी जाए (जो भगवान करें कि ज्‍यादा ही हो) तब आपको 2 करोड़ 50 लाख रुपये के रिटायमेंट कॉर्पस की जरूरत होगी।

दूसरे केस में अगर महंगाई दर एकसमान रूप से 8 प्रतिशत रखी जाए तो रिटायरमेंट बाद मासिक खर्च 2 लाख 74 हजार रुपये होगा।

80 साल की जीवन प्रत्‍याशा मान लेने पर आपको 6 करोड़ 58 लाख रुपये के रिटायरमेंट कॉर्पस की जरूरत होगी। ताकि 80 साल की उम्र तक आपकी गुजर बसर आराम से चल सके।

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म्‍युचुअल फंड से करें रिटायरमेंट के लिए निवेश

Retirement Planning kaise kare : अब आप रिटायरमेंट प्‍लानिंग के तहत इन्‍वेस्‍टमेंट करने का मन बना चुके हैं तो अगला सवाल ये होगा कि हम 5-7 करोड़ की इतनी बड़ी धनराशि कैसे जुटाएंगे। म्‍युचुअल फंड की ईएलएसएस स्‍कीम्‍स के जरिए आप बेहतरीन तरीके से रिटायरमेंट प्‍लानिंग कर सकते हैं।

आप म्‍युचुअल फंड की इक्विटी आधारित बेहतरीन ओपन एंडेड टॉप स्‍कीम्‍स में भी निवेश कर सकते हैं। इनमें 20 से 25 साल के लम्बे समय के लिए एकमुश्‍त (Lumpsum) या एसआईपी (Systematic investment plan) के जरिए निवेश किया जा सकता है।

दीर्घावधि में म्‍युचुअल फंड के रिटर्न सबसे आकर्षक होते हैं, जो रिटायरमेंट प्‍लानिंग में बेहद मददगार है।

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एक मूलभूत नियम है कि सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने चाहिए। फाइनेंशि‍यल प्‍लानिंग करते वक्‍त इसे थंब रूल बना लें। आपको रिटायरमेंट प्‍लानिंग के लिए कुछ पैसा पीपीएफ, पीएफ और गारंटीड रिटर्न देने वाली जमा योजनाओं में रखना चाहिए।

अगर आप भी रिटायरमेंट के लिए अपनी फाइनेंशियल प्‍लानिंग कराना चाहते है तो वाट्सएप चैट पर सवाल पूछें अथवा 917007367525 पर कॉल करें।

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