म्‍यूचुअल फंड सही है,लेकिन किस तरह के निवेशक के लिए? यहां जानें

म्‍यूचुअल फंड सही है : बचत करने से हमेशा बेहतर है निवेश। जब निवेश की बात आती है तो हम परंपरागत निवेश साधनों की बात भी बचत के लिहाज से करते हैं।

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जैसे– बैंक और पोस्‍ट ऑफ‍िस की एफडी (Fixed deposit) और आरडी (Recurring deposit) स्‍कीमें। बहुत से लोग मामूली ब्‍याज पर बैंक के बचत खाते में पैसे जमा रखकर भी संतुष्‍ट रहते हैं कि चलो, हमारा मूलधन सुरक्ष‍ित है। बैंक में आपका कितना पैसा सुरक्ष‍ित है, इस बारे में पहले के एक लेख में बताया जा चुका है।

म्‍यूचुअल फंड में किसे निवेश नहीं करना चाहिए?

म्‍यूचुअल फंड सही है, लेकिन इसमें निवेश क्‍यों सही इससे पहले यह जानना जरूरी है कि म्‍यूचुअल फंड में निवेश किस तरह के निवेशक के लिए सही है? और किस तरह के निवेशक के लिए सही नहीं है? पहले बात करते हैं कि किस तरह के लोगों को इसमें निवेश नहीं करना चाहिए।

इसके निम्‍न बिन्‍दु हैं–

।–अगर कोई निवेशक एक निश्चित समयावधि में फ‍िक्‍स या गारंटीड रिटर्न चाहता है (बैंक एफडी और पोस्‍ट ऑफ‍िस जमा योजनाओं की तर्ज पर)।

2-जिनमें जोखिम लेने की क्षमता बिलकुल न हों।

3-जिन्‍हें एनएवी के गिरते ही मूलधन या मुनाफा घटने का डर सताए।

4-जिनमें धैर्य और साहस की नितांत कमी हों और पूर्वाग्रह से ग्रसित हों।

5-जो रातों-रात या बहुत कम समय में तगड़ा मुनाफा कमाने की सोचते हैं।

जिन लोगों में ये चीजें हों उन्‍हें शायद म्‍युचुअल फंड की बजाय सुरक्षि‍त समझे जाने वाली जमा योजनाओं की तरफ जाना चाहिए। क्‍योंकि अगर ऐसे लोगों ने निवेश किया भी तो वो अपने आर्थिक लक्ष्‍यों को प्राप्‍त नहीं कर पाएंगे। या बीच में ही म्‍युचुअल फंड की स्‍कीम से पैसा निकालकर अलग हो जाएंगे।

डेट आधारित म्‍यूचुअल फंड जोखिम रहित होते हैं

आपको बता दें कि म्‍यूचुअल फंड की सभी स्‍कीमें इक्विटी आधारित नहीं होतीं। डेट स्‍कीमें बेहद सुरक्षित साधनों जैसे ट्रिपल ए बांड आदि में निवेश करती है। इनमें लिक्विड फंड्स भी शामिल हैं, जिनमें कोई जोखिम नहीं रहता। यहां तक कि सरकारी बड़े बैंक भी लिक्विड फंड में निवेश करते हैं।

इनमें आमतौर पर सेविंग अकाउंट से ज्‍यादा और बैंक एफडी के बराबर या उससे ज्‍यादा का रिटर्न मिलता है। हालांकि, कभी कभार इनकी एनएवी में बड़ी गिरावट देखने में आ जाती है। जो स्‍थायी नहीं होती।

वहीं, अगर किसी ने 5–10 साल और इससे ज्‍यादा लम्‍बे वक्‍त की एसआईपी की है। तो इक्विटी आधारित म्‍यूचुअल फंड में जोखिम लगभग खत्‍म हो जाता है।

एसआईपी के गुणों के बारे में जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें।

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निवेश के जिन साधनों में असीमित लाभ होता है उनमें फ‍िक्‍स रिटर्न की बात बेमानी है। जैसे– शेयर बाजार के स्‍टॉक्‍स

म्‍यूचुअल फंड में किसे निवेश करना चाहिए?

म्‍यूचुअल फंड के निवेशक में नीचे दिए गए गुणों का होना जरूरी हैं-

1- निवेशक धैर्यवान और स्थिर मन–बुद्धि से युक्‍त हों।

2- कम से कम कैलकुलेटिव रिस्‍क लेने की क्षमता हों।

3- उसे जानकारी हो या जानने का उत्‍सुक हो कि कैसे म्‍युचुअल फंड की स्‍कीमें लाभ प्रदान करती हैं। भले ही उन्‍हें शेयर बाजार की कोई समझ न हो।

4- शेयर मार्केट के गिरने और फंड एनएवी के घटने पर विचलित न हों।

5- उसके कुछ आर्थिक लक्ष्‍य जरूर हों। जैसे- शादी, बच्‍चों की पढ़ाई के खर्च, कार-मकान आदि खरीदना।

6- जिन्‍हें महंगाई का मुकाबला करने के लिए ज्‍यादा और आकर्षक रिटर्न चाहिए।

7- जो लम्‍बे समय तक निवेशित रह सकें।

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म्‍यूचुअल फंड से बेतहाशा लाभ कमाने के लिए निवेशक में अत्‍यंत धैर्य और स्थिर मन–बुद्धि के साथ कैलकुलेटिव रिस्‍क लेने की क्षमता होनी चाहिए। निवेशक को उन्‍हीं पैसों का इन्‍वेस्‍ट करना चाहिए, जिनकी जरूरत उसे कई वर्षों तक न रहे।

निवेश के‍ लिए भले ही उसके पास पैसा ज्‍यादा न हों, लेकिन म्‍यूचुअल फंड में पैसा कैसे और कब बढ़ता है उसकी समझ होनी चाहिए। अगर नहीं है तो समझ कि‍सी विश्‍वसनीय सोर्स से प्राप्‍त करें। ऐसा करने से वे निवेश में लम्‍बे समय तक टिके रहेंगे।

अब उनके लिए क्‍या, जिनमें जरा भी वित्‍तीय समझ नहीं है? क्‍या वो लोग म्‍यूचुअल फंड से लाभ नहीं ले सकते? बिलकुल ले सकते हैं। बशर्तें उनमें सबसे ऊपर दिए गए 2 गुण अवश्‍य हों।

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म्‍यूचुअल फंड में एसआईपी से करें निवेश

निवेशक को चाहिए कि धैर्य के साथ किसी अच्‍छे फंड में एसआईपी के जरिए निवेश करें। रोज–रोज फंड एनएवी चेक न करें। मार्केट गिरने पर कभी पैनिक न लें। अगर हो सके तो हर गिरावट में टॉप अप कर दें। नहीं तो चुपचाप एसआईपी को अपना काम करने दें। एसआईपी का एक मतलब Sleep In Peace भी होता है। यानी मार्केट गिरे या बढ़े, कोई अधीरता न दिखाएं।

हां, कभी आपको 1 या दो साल के अंदर फंड में प्रॉफ‍िट होते दिखे तो पैसा बिलकुल न निकालें। कुछ सालों बाद आप देखेंगे कि आपका थोड़ा–थोड़ा निवेश कैसे पैसों का लबालब फलदार पेड़ बन गया है। ये आजमाया हुआ फार्मूला है।

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